वो अधिकार जो नैसधगिक रूप से होने चाहहयें तथा शरीअत ने भी उन्हें अनुमोहित ककया है - Articles - हिन्दी - शैख़ हैस़म बबन महु म्मद जमील िरह़ान - IslamHouse - 448.53 KB | بلاغ